Saturday, 1 January 2022

[ राजनीति शास्त्र का परिचय ]

राजनीतिराजनीति विज्ञान क्रमशः अंग्रेजी शब्द Politics तथा Political Science शब्दों के अनुवाद हैं । अंग्रेजी का Politics शब्द ग्रीक भाषा के Polis तथा Politiea से बना है, जिसका अर्थ है नगर-राज्य । यूनान में एक समय छोटे-छोटे राज्य होते थे, जिनको नगर राज्य कहा जाता था तथा इन नगर-राज्यों से सम्बंधित अध्ययन को Politics नाम दिया । प्रसिद्द यूनानी राजनीतिक दार्शनिक अरस्तू ने भी अपने राज्य विषयक ग्रन्थ का नाम इसलिए Politics रखा था । इस प्रकार कह सकते हैं कि - "राजनीतिक विज्ञान वह सामाजिक विज्ञान है, जो राज्य से सम्बंधित विषयों जैसे यथा, राज्य की प्रकृति, उद्भव, विकास, कार्य, प्रकार तथा उसकी शासन-व्यवस्था आदि का अध्ययन करता है ।"

🔘 प्रचलित परिभाषायें :

Sunday, 26 December 2021

[ भारतीय संसद ]



संसद  भवन संपदा :

संसद भवन संपदा के अंतर्गत संसद भवन, स्वागत कार्यालय भवन, संसदीय ज्ञानपीठ (संसद ग्रंथालय भवन) संसदीय सौध और इसके आस-पास के विस्तृत लॉन, जहां फव्वारे वाले तालाब हैं शामिल ।

संसद भवन , नई दिल्ली स्थित सर्वाधिक भव्य भवनों में से एक है, जहाँ विश्व में किसी भी देश में मौजूद वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूनों की उज्ज्वल छवि मिलती है ।

भवन का निर्माण :

Saturday, 18 December 2021

[ अर्थशास्त्र का परिचय ]

"अर्थशास्त्र" को अंग्रेज़ी भाषा में "Economics" कहा जाता है । "Economics" शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों 'Oihos' (household) तथा 'Nemein' (to manage) से लिया गया है, जिनका अर्थ है 'घरेलू प्रबन्ध' (Household Management) । यूनान के विश्वविख्यात दार्शनिक अरस्तू ने अपनी पुस्तक Politics में अर्थशास्त्र को 'गृह-प्रबन्धन का विज्ञान' बताया । उनके अनुसार अर्थशास्त्र का सम्बन्ध 'विनिमय तथा धन-प्राप्ति' से है । इसी प्रकार प्राचीन भारतीय विद्वानों में मनु ने अपनी पुस्तक 'मनुस्मृति' तथा कौटिल्य ने अपनी पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में अर्थशास्त्र को मुख्यतः 'राज्य के आर्थिक क्रियाकलापों' तक सीमित रखा ।

अर्थशास्त्र का जन्म सन् 1776 में हुआ जब एडम स्मिथ की 'An Enquiry into the Nature and Cause of the Wealth of Nations' नामक पुस्तक प्रकाशित हुई । इसी कारण एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का जन्मदाता (Father of Economics) कहा जाता है ।

Wednesday, 15 December 2021

[ भारतीय इतिहास के स्त्रोत ]

आद्य इतिहास लिखते समय इतिहासकार साहित्यिक तथा पुरातात्त्विक दोनों प्रकार के साक्ष्यों का उपयोग करते हैं । इन सभी स्त्रोतों का उपयोग करके इतिहासकार काल विशेष का सही-सही चित्र प्रस्तुत करने का प्रयत्न करता है । 

  • पुरातात्त्विक स्त्रोत : प्राचीन भारत के अध्ययन के लिए पुरातात्त्विक स्त्रोतों का विशेष महत्त्व है । उसके प्रमुख तीन कारण हैं :

पहला यह कि भारतीय ग्रथों का रचनाकाल ठीक से ज्ञात नहीं है, इसलिए उनसे किसी काल विशेष की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का ज्ञान नहीं होता । 

दूसरा यह कि साहित्यिक साधनों में लेखक का दृष्टिकोण भी अधिकतर सही व्याख्या करने में बाधक हो जाता है ।

तीसरा यह कि ग्रथों की प्रतिलिपि करने वालों ने अपनी इच्छानुसार अनेक प्राचीन प्रकरणों को छोड़ दिया और नए प्रकरण जोड़ दिये ।

अभिलेख : पुरातात्त्विक स्त्रोतों के अन्तर्गत सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण स्त्रोत अभिलेख हैं । प्राचीन भारत के अधिकतर अभिलेख पत्थर या धातु की चादरों पर खुदे मिले हैं । यद्यपि सभी अभिलेखों पर उनकी तिथि अंकित नहीं है, फिर भी अक्षरों की बनावट के आधार पर उनका काल निर्धारित हो जाता है ।

सबसे प्राचीन अभिलेख अशोक के हैं, केवल भूतपूर्व निज़ाम के राज्य में स्थित मास्की नामक स्थान और गुज्जर्रा (मध्य प्रदेश) से प्राप्त अभिलेखों में अशोक के नाम का स्पष्ट उल्लेख है । अशोक के अधिकतर अभिलेख "ब्राह्मी लिपि" में हैं जिससे भारत की हिन्दी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, और मराठी, तमिल, तेलगु, कन्नड़ आदि सभी भाषाओं की लिपियों का विकास हुआ था ।

केवल उत्तर-पश्चिमी भारत में मिले कुछ अभिलेख "खरोष्ठी लिपि" में हैं । खरोष्ठी लिपि फ़ारसी लिपि की तरह दाईं से बाईं ओर को लिखी जाती थी । ब्राह्मी लिपि को सबसे पहले 1837 में प्रिंसेप नामक विद्वान ने पढ़ा था । इसके अतिरिक्त अशोक के कुछ अभिलेख "अरामाइक लिपि" में हैं ।


[ भारतीय इतिहास का परिचय ]

भारतीय इतिहास-लेखन की परम्परा भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना के पश्चात् 18 वीं शताब्दी में प्रारम्भ हुई । भारत के इतिहास को पुनर्जीवित करने में "एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल" की भूमिका उल्लेखनीय रही, जिसकी स्थापना 1784 ई. में कलकत्ता में वारेन हेस्टिंग्स एवं सर विलियम जोन्स के द्वारा हुई ।  

महाभारत के रचियता वेदव्यास के अनुसार महाराज दुष्यन्त के पुत्र सम्राट भरत के नाम पर "भरत का देश" इस आशय से "भारतवर्ष" नाम पड़ा ।

ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार :

Tuesday, 14 December 2021

[ संविधान निर्माण की प्रक्रिया ]

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रीय नेताओं ने लगातार एक संविधान सभा के निर्माण की मांग की । भारत में संविधान सभा के गठन का विचार वर्ष 1934 में पहली बार मानवेन्द्र नाथ राय ने रखा था । वर्ष 1935 में राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा आधिकारिक रूप से संविधान के गठन की मांग की गयी । वर्ष 1938 में जवाहर लाल नेहरु ने स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण के लिए वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनी गयी संविधान सभा की मांग की । अन्ततः 1940 में ब्रिटिश सरकार ने नेहरु की मांग को स्वीकृति प्रदान की जो "अगस्त प्रस्ताव" के नाम से जाना गया । 1946 के कैबिनेट मिशन के आधार पर संविधान सभा के गठन की व्यवस्था की गयी । 

भारत के संविधान के गठन की समयरेखा :


✔ 6 दिसंबर 1946: संविधान सभा का गठन (फ्रांसीसी प्रथा के अनुसार)। 

Friday, 19 November 2021

[ स्थिर वैद्युतिकी ]

✓ स्थिर वैद्युतिकी :     "वैद्युतिकी का वह अध्ययन जिसमें वैद्युत आवेश स्थिर रहता है, स्थिर वैद्युतिकी कहलाता है ।"

✓ वैद्युत आवेश :        "वैद्युत आवेश द्रव्य का वह गुण है जिसके कारण वह वैद्युत तथा चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करता है  तथा उसका 

                               अनुभव करता है ।"

                               ⟨ q = i×t         एम्पियर-सेकंड 

राशि : अदिश         मात्रक : कूलाम्ब        विमा : [ M0L0T1A1]

आवेश दो प्रकार के होते हैं : धनात्मक एवं ऋणात्मक ।