✓ द्रव्य : “हर वह वस्तु जिसमे भार होता है और जगह घेरती है, उसे द्रव्य कहते हैं ।” किसी भी वस्तु में द्रव्य की मात्र को द्रव्यमान कहते हैं ।
द्रव्य को दो प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है :
1) भौतिक वर्गीकरण
2) रासायनिक वर्गीकरण
A. ठोस : “द्रव्य की वह अवस्था जिसका आकार व आयतन निश्चित होता है, ठोस कहलाती है ।”
जैसे : धातुएं, लकड़ी आदि ।
B. द्रव : “द्रव्य की वह अवस्था जिसका आयतन तो निश्चित होता है लेकिन आकार नहीं, द्रव कहलाती है ।”
जैसे : जल, दूध, आदि ।
C. गैस : “द्रव्य की वह अवस्था जिसका न तो आकार निश्चित होता है न ही आयतन, गैस कहलाती है ।”
जैसे : हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, आदि ।
2) रासायनिक वर्गीकरण : रासायनिक संघटन के आधार पर द्रव्य को निम्न उपवर्गों में विभाजित किया जा सकता है :-
A. शुद्ध पदार्थ : “वे पदार्थ जो सिर्फ एक ही प्रकार के पदार्थों से मिलकर बने होते हैं, शुद्ध पदार्थ कहलाते हैं ।”
शुद्ध पदार्थों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है :-
(i) तत्व : “वह पदार्थ जो तोड़ा नहीं जा सकता है और न ही दो या दो से अधिक साधारण पदार्थों से भौतिक या रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा बनाया जा सकता है, तत्व कहलाता है ।”
जैसे: तांबा, चांदी आदि ।
तत्वों को पुन: तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है:-
(a) धातु : “धातु वे ठोस तत्व होते हैं, जिनमे स्वभाविक चमक, कठोरता, तन्यता तथा विधुत व ऊष्मा के सुचालक होने का गुण होता है ।”
जैसे : लोहा, तांबा, आदि ।
(b) अधातु : “अधातु वे तत्व होते हैं, जिनमें भंगुरता पायी जाती है तथा जो चमकरहित होते हैं, विधुत व ऊष्मा के कुचालक होते हैं ।”
जैसे : कार्बन, फास्फोरस, आदि ।
(c) उपधातु : “वे तत्व जिनमें धातु तथा अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं, उपधातु कहलाते हैं ।”
जैसे : जरमेनियम, आर्सेनिक, आदि ।
(ii) यौगिक : “दो या दो से अधिक तत्वों का निश्चित अनुपात में संयोजन, यौगिक कहलाता है । इनको किसी भी विधि द्वारा वापिस विभाजित किया जा सकता है ।”
इन यौगिकों के गुणधर्म इनके घटक तत्वों से बिलकुल ही भिन्न होते हैं ।
जैसे : लवण, शर्करा, आदि ।
यौगिकों को निम्नलिखित दो वर्गों में बाँटा गया है :-
(a) अकार्बनिक यौगिक : “वे यौगिक जो निर्जीव स्त्रोतों (जैसे समुद्री जल, पृथ्वी पटल, चट्टान, आदि) से प्राप्त होते हैं, अकार्बनिक यौगिक कहलाते हैं ।” ये यौगिक तत्वों के संयोग से प्राप्त होते हैं ।
जैसे : पोटैशियम सल्फेट, सोडियम नाइट्रेट, आदि ।
(b) कार्बनिक यौगिक : “वे यौगिक जो जीवित स्त्रोत, जन्तुओं व वनस्पतियों से प्राप्त होते हैं, कार्बनिक यौगिक कहलाते हैं ।”
जैसे : चीनी, यूरिया, मोम, वसा, आदि ।
B. मिश्रण : “जब हम दो या दो से अधिक पदार्थ, तत्व या यौगिक को अनिश्चित अनुपात में मिलते हैं तो प्राप्त होने वाले पदार्थ को मिश्रण कहते हैं ।” मिश्रण में घटकों का गुणधर्म अपरिवर्तित रहता है ।
जैसे : वायु, काँच, पेट्रोल, आदि ।
मिश्रण को दो वर्गों में विभाजित किया गया है :-
(i) समांगी मिश्रण : “वह मिश्रण जिसमें अवयव पूर्णतया मिश्रित हो जाए व पूरे मिश्रण का संघटन एक समान हो, समांगी मिश्रण कहलाता है ।”
“ऐसे मिश्रण जिसमें दो या दो से अधिक अवयव उपस्थित होते हैं किंतु उन्हें अलग-अलग देखा नहीं जा सकता उन्हें समांगी मिश्रण कहते हैं।“
जैसे : जल में चीनी का विलयन, नमक और पानी का मिश्रण ।
(ii) विषमांगी मिश्रण : “वह मिश्रण जिसमे अवयव पूर्णतया मिश्रित न हो पाए व मिश्रण का संघटन एक समान नहीं होता, विषमांगी मिश्रण कहलाता है ।”
“ऐसे मिश्रण जिनमें दो या दो से अधिक अवयव उपस्थित होते हैं तथा उन्हें अलग-अलग देखा जा सकता है उन्हें विषमांगी मिश्रण कहते हैं ।”
जैसे : बालू व लकड़ी की छीलन का मिश्रण, तेल और पानी का मिश्रण ।
महत्वपूर्ण बिंदु :
- आयतन : “सभी पदार्थ स्थान (त्रि-बीमीय स्थान) घेरते हैं। इसी त्रि-बीमीय स्थान की मात्रा की माप को आयतन कहते हैं। एक-बीमीय आकृतियाँ (जैसे रेखा) एवं द्वि-बीमीय आकृतियाँ (जैसे त्रिभुज, चतुर्भुज, वर्ग आदि) का आयतन शून्य होता है।“
- तन्यता : “पदार्थ विज्ञान में तन्यता किसी ठोस पदार्थ की तनाव डालने पर खिचकर आकार बदल लेने की क्षमता को बोलते हैं। तन्य पदार्थ आसानी से खींचकर तार के रूप में बनाए जा सकते हैं, जबकि अतन्य पदार्थ तनाव डालने पर असानी से नहीं खिंचते और अक्सर टूट जाते हैं। सोना और ताम्बादोनों तन्य पदार्थों के उदाहरण हैं।
- आघातवर्धनीयता: "आघातवर्धनीयता किसी पदार्थ की दबाव या आघात पड़ने पर बिना टूटे आकार बदल लेने की क्षमता को कहते हैं।" मसलन चाँदी को 1पीटकर उसका मिठाई व पान पर चढ़ाने वाला वर्क इसलिए बनाया जा सकता है क्योंकि वह तत्व आघातवर्धनीय है।
- भंगुरता : “किसी पदार्थ को प्रतिबलित करने पर (तानने, दबाने, मोड़ने, पीटने आदि पर) यदि विकृत होने (तनने, सिकुड़ने, मुड़ने, फैलने आदि) के बजाय टूट जाय तो पदार्थ के इस गुण को भंगुरता (Brittleness) कहते हैं। अधिकांश सिरामिक पदार्थ, काँच और कुछ बहुलक भंगुर हैं।
- चालक : “वे पदार्थ जिनमें मुक्त इलेक्ट्रान होते हैं अर्थात् जिनमे धारा व ऊष्मा का प्रवाह सम्भव है, चालक कहलाते हैं ।”
- सुचालक : “वे चालक जिनमें मुक्त इलेक्ट्रानों की संख्या अधिक होती है तथा ऊष्मा व धारा का प्रवाह अत्यंत सुगमता से हो सके, सुचालक कहलाते हैं ।”
- कुचालक : “वे चालक जिनमें मुक्त इलेक्ट्रानों की संख्या नहीं होती है तथा ऊष्मा व धारा का प्रवाह सम्भव न हो सके, कुचालक कहलाते हैं ।”
✓ द्रव्य के गुणधर्म : प्रत्येक पदार्थ के विशिष्ट या अभिलाक्षणिक गुणधर्म होते हैं । इन गुणधर्मों को दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है :-
1) भौतिक गुणधर्म : “भौतिक गुणधर्म वे गुणधर्म होते हैं जिन्हें पदार्थ की पहचान या संघटन को परिवर्तित किये बिना मापा या देखा जा सकता है ।”
जैसे : रंग, गंध, गलनांक, क्वथनांक आदि ।
2) रासायनिक गुणधर्म : “रासायनिक गुणधर्म वे गुणधर्म होते हैं, जिनमें रासायनिक परिवर्तन का होना आवश्यक है ।”
जैसे : अम्लता या क्षारीयता आदि ।

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